इंट्रो: फ्री क्रेडिट नहीं, महंगा कर्ज
क्रेडिट कार्ड को अक्सर “फ्री क्रेडिट” और “रिवॉर्ड्स” के नाम पर बेचा जाता है, लेकिन असल में ये सबसे महंगे कर्ज के रूप में काम करते हैं। ज्यादातर लोगों को वही बातें बताई जाती हैं जो सेल करना आसान बनाती हैं, असली शर्तें और रिस्क छुपे रहते हैं।
1. 45 दिन का फ्री पीरियड – हर बार नहीं मिलता
बैंक आपको बताते हैं कि “up to 45 days interest‑free period” मिलेगा, पर ये हर ट्रांज़ैक्शन पर लागू नहीं होता। अगर आप पुराना बकाया पूरा क्लियर नहीं करते, तो नए खर्च पर भी पहले दिन से ही इंटरेस्ट लग सकता है।
- कई कार्ड में अगर आप पूरा बिल नहीं भरते, तो पूरा आउटस्टैंडिंग amount “revolver” बन जाता है और पूरा अमाउंट इंटरेस्टेबल हो जाता है।
- कई लोग सोचते हैं कि “थोड़ा‑थोड़ा भर देंगे”, पर ऐसा करते ही फ्री पीरियड लगभग खत्म हो जाता है और बिल तेज़ी से बढ़ने लगता है।
2. सिर्फ “मिनिमम पेमेंट” भरना – कर्ज का जाल
स्टेटमेंट में सबसे बड़े फॉन्ट में “Minimum Amount Due” दिखाया जाता है, जिससे लगता है बस इतना भरना काफी है। हकीकत में ये बैंक की सबसे स्मार्ट ट्रिक है जिससे आप सालों तक कर्ज में फँसे रहते हैं।
- मिनिमम पेमेंट अक्सर कुल बकाया का 3–5% होता है, यानी ज्यादातर पैसा इंटरेस्ट और चार्जेज में चला जाता है, प्रिंसिपल कम ही होता है।
- आप सोचते हैं “डिफॉल्ट नहीं होगा, CIBIL नहीं खराब होगा”, पर वही EMI‑जैसा कर्ज बन जाता है जो महीनों/सालों तक खिंचता है।
3. 35–45% सालाना इंटरेस्ट – सबसे महंगा कर्ज
बैंक क्रेडिट कार्ड के इंटरेस्ट को अक्सर “3% प्रति माह” जैसे छोटे नंबर में बताते हैं ताकि सुनने में कम लगे। लेकिन जब वही 3% × 12 महीने करते हैं, तो ये 36%+ सालाना कर्ज बन जाता है।
- पर्सनल लोन जहां 11–18% के बीच हो सकता है, वहीं क्रेडिट कार्ड रिवॉल्विंग बैलेंस पर 30–45% तक जा सकता है।
- अगर आप हर महीने पूरा बिल नहीं भरते, तो छोटा सा बकाया भी कंपाउंड इंटरेस्ट की वजह से बहुत तेजी से बढ़ता है।
4. “No‑Cost EMI” में छिपे चार्जेज
शॉपिंग साइट और बैंक मिलकर “No‑Cost EMI” को free instalment की तरह बेचते हैं, लेकिन अक्सर असली cost कहीं और छुपी होती है।
- कई केस में प्रोडक्ट का बेस प्राइस बढ़ाकर EMI प्लान दिया जाता है, यानी डिस्काउंट की जगह EMI benefit दिखाया जाता है।
- प्रोसेसिंग फीस, कंवीनियंस फीस, GST on interest/fee – ये सब मिलकर आपको normal discount + one‑shot payment से ज्यादा महंगा पड़ सकता है।
5. रिवॉर्ड पॉइंट्स की वैल्यू – जितना दिखता है उतना नहीं
बैंक आपको reward points, cashback, air miles के सपने दिखाकर ज्यादा खर्च करने के लिए motivate करते हैं। लेकिन पॉइंट्स की असली वैल्यू अक्सर बहुत कम होती है।
- कई कार्ड में 1 पॉइंट = 0.25 या 0.50 रुपये के बराबर होता है, यानी 1000 रुपये खर्च करके शायद 5–10 रुपये की वैल्यू मिलती है।
- redemption पर भी शर्तें होती हैं – कैटलॉग में महंगे प्रोडक्ट, booking fees, या limited categories; cashback भी सिर्फ certain spends पर।
6. हिडन फीस: लेट फीस, ओवर‑लिमिट और इंटरनेशनल मार्क‑अप
अक्सर लोग सिर्फ “वार्षिक शुल्क” (annual fee) देखते हैं, लेकिन असली चोट hidden charges से लगती है।
- लेट पेमेंट फीस: समय पर पूरा बिल न भरने पर fixed penalty + इंटरेस्ट दोनों लगते हैं।
- ओवर‑लिमिट फीस: लिमिट से थोड़ा ऊपर भी खर्च हो जाए तो extra charge और कभी‑कभी इंटरेस्ट slab भी बदल जाता है।
- Forex mark‑up: इंटरनेशनल ट्रांज़ैक्शन पर 2–3.5% तक मार्क‑अप + GST – यानी nominal rate से कहीं ज्यादा actual cost।
7. “लाइफटाइम फ्री कार्ड” भी हमेशा फ्री नहीं रहता
कई कार्ड “Lifetime Free” बोलकर दिए जाते हैं, लेकिन fine print में conditions छुपी होती हैं।
- कुछ कार्ड में “X amount की yearly spend” नहीं हुई तो अगले साल से annual fee लगेगी।
- अगर आप कार्ड कम इस्तेमाल करते हैं, तो rewards भी नहीं बनते और साल बाद अचानक fee debit हो जाती है, जो waiver के लिए threshold से लिंक्ड होती है।
क्रेडिट कार्ड को स्मार्टली यूज़ कैसे करें (धोखे से बचते हुए)
धोखे समझ आ गए, अब ज़रूरी है कि कार्ड को पूरी तरह avoid करने के बजाय स्मार्टली use किया जाए।
- हमेशा पूरा outstanding भरें, सिर्फ minimum payment नहीं।
- credit period को free loan न समझें – emergency fund और खर्च की planning रखें।
- No‑Cost EMI लेने से पहले प्रोडक्ट का cash price vs EMI price compare करें।
- साल में 1–2 बार statement detail चेक करें – hidden charges, extra fees, गलत debits पकड़ने के लिए।
अगर आप क्रेडिट कार्ड को “रिवॉर्ड मशीन” नहीं, बल्कि “डिसिप्लिन टेस्ट” मानकर यूज़ करेंगे, तो ये आपके लिए useful tool बन सकता है, वरना ये सबसे महंगा कर्ज बनकर आपके पूरे financial प्लान को बिगाड़ सकता है।